Tuesday, November 17, 2009

चोटों पे चोट देते ही जाने का शुक्रिया,

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Jaane Kya Hai Dil Ke Andar Jo Chupke Say Toot Raha Hai
Ek Meherbaan Ka Haath Jaise Haathon Say Choot Raha Hai

Lamha Lamha Guzar Ke Dafan Ho Raha Hai Seene Mein
Seh Kar Ye Dard Kuch Ajab Maza Aane Laga Hai Jeene Mein
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Dil se...

Tum Hanso Toh

Khushi Mujhe Hoti Hai

Tum Rootho Toh

Aankhai'n Meri Roti Hai

Tum Duur Jao Toh

Bechaini Mujhe Hoti Hai

Mehsoos Ker K Tou Dekho

DIL SE dosti Aisi Hii Hoti Hai......


जाने किसका कबिला तलाश करता है,
फ़किर शहर का नक्शा तलाश करता है,
मिटा के रात की तारिकियां, ये सुरज भी,
जमी पे अपना ही साया तलाश करता है,
बना के खंदके हर सिम्त अपने हाथों से,
अजीब शक्स है रास्ता तलाश करता है,
मै जानता हु मेरी प्यास पर तरस खाकर,
वो मेरी ऑंखों मे एक दरिया तलाश करता है,
hirendra.... आज वो आईने बेचनेवाला....
कुए में झांकके अपनाही....
चेहरा तलाश करता है.....

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चोटों पे चोट देते ही जाने का शुक्रिया,

पत्थर को बुत की शक्ल में लाने का शुक्रिया,

जाग रही तो मैंने नए काम कर लिए,

नींद आज तेरे आने का शुक्रिया,

सूखा पुराना जख्म, नए को जगह मिली,

स्वागत नए का और पुराने का शुक्रिया,

आते तुम तो क्यों मैं बनाती ये सीढ़ियाँ,

दीवारों, मेरी राह में आने का शुक्रिया

आँसू-सी माँ की गोद में आकर सिमट गयी,

नजरों से अपनी मुझको गिराने का शुक्रिया,

अब यह हुआ कि दुनिया ही लगती है मुझको घर,

यूँ मेरे घर में आग लगाने का शुक्रिया,

गम मिलते हैं तो और निखरती है शायरी,

यह बात है तो सारे जमाने का शुक्रिया ।।।।।।।।।।।।।।।

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