Sunday, August 22, 2010

sms mobile sending pages

1 "Never leave the one who cares for you otherwise you wud be left all alone...”

2 "Relation is like a glass a scratch on any side wll reflect on d other side 2 so always handle feelings carefully becz den d scratch cant b removed"

3 "RAVAN KO CORURT LAYA GAYA OR KAHA GITA PE HAAT RAKHO . RAVAN CHILLAYA ..... SALA SITA PE HATE RAKHA TO ITNA BAWAL HO GAYA AB GITA PE NAHI RAKHUGA ..... "


Ek tumko hame yaad karneki fursat nahin,
ek hamko tumhe bhulane ki aadat nahin,
tumhe bhulake jiye bhi to kaise,
sanso ke bina jeene ki aadat bhi to nahin.

kabhi unki yaad aati hai, kabhi unke khawab aate hain
Unhe satane ki salike unhein behisaab aatein hain....
kayamat dekhni ho gar chale jana us mehfil mein
suna hai us mehfil mein woh benakab aate hain.....



Aata nahi wo kabhi aane k baad bhi
Rehta hai pass hi, kabhi jane k baad bhi
Samjha tha raat aur baat hoi khatam
Jari raha fasaana fasaane k baad bhi.......



jab yaad karte hai kisi ko
wo waqt suhana hota hai

uth jati hai kalam likhne ko
wo pyar deewana hota hai

kar deti hai haal-e-dil bayaan
wo kalaam shayraana hota hai

jab yaad karte hai kisi ko
wo waqt suhana hota hai...


kia bichar jana uss ka liyaa koi maani nahi rakhta...
Jafaoon ka Hisaab wo Zubani nahi rekhta...
Roota ha Ya uss Roona Nahi aataa
SungdiL ha Ya Ankhoon ma Paani nahi rekhta...



ye musafir log patjhar mai chale jate hain door
in ki khatir sheesha e dil lahoo rang mat kijiye.....




DO HI LAFZO KA THA WO FASANA “FARAZ”
JO SUNA KAR KHAMOSH HO BETHEY
EBTADA YE K USSE CHAHA THA..
INTAHA YE K KHUD KO KHO BETHAY….....!!!!!



Raat Katti Rahi Chand Dhalta Raha !!
Aatish-e-Hijar Mein Koi Jalta Raha !!
Ghar Ki Tanhai Dil Ko Dasti Rahi !!
Koi Bechain Kerwat Badalta Raha !!
Aaso Umeed Ki Shama Roshan Rahi !!
Ghar Ki Dheleez Ko Koi Takta Raha !!
Raat Bhar Chandni Gungunati Rahi !!
Raat Bhar Koi Tanha Siskta Raha !!
Ashk Palkon Pe Aa Kar Bhikherte Rahe !!
Naam Lab Per Tumhara Larazta Raha !!
Aj Phir Raat Ho Gai !!
Aj Phir Koi Khud Se Ulajhta Raha !!



Tanhai jub muqaddar mein likhi hai,
To kya shikayat apno'n aur baygano'n se,
Hum mit gaye jin ki chahat main,
Woh baaz nahi aatay hamain azmanay se.......!


wo chand chehra jo mere dil ki dharkan mai hai,
wo kyun mere jazbat se iss tarah bekhabar sa hai,
humne to jazbon ki sadakat se chaha usko,
phir bhi na jane wo kyun hum se be rabt sa hai...






Love and sex conflict

प्रेम और सेक्स में विरोध

आप जानकर हैरान होंगे, प्रेम और काम, प्रेम और सेक्स विरोधी चीजें हैं। जितना प्रेम विकसित होता है, सेक्स क्षीण हो
जाता है। और जितना प्रेम कम होता है, उतना सेक्स ज्यादा हो जाता है। जिस आदमी में जितना ज्यादा प्रेम होगा, उतना
उसमें सेक्स विलीन हो जाएगा। अगर आप परिपूर्ण प्रेम से भर जाएंगे, आपके भीतर सेक्स जैसी कोई चीज नहीं रह जाएगी।
और अगर आपके भीतर कोई प्रेम नहीं है, तो आपके भीतर सब सेक्स है।
सेक्स की जो शक्ति है, उसका परिवर्तन, उसका उदात्तीकरण प्रेम में होता है। इसलिए अगर सेक्स से मुक्त होना है, तो
सेक्स को दबाने से कुछ भी न होगा। उसे दबाकर कोई पागल हो सकता है। और दुनिया में जितने पागल हैं, उसमें से सौ में
से नब्बे संख्या उन लोगों की है, जिन्होंने सेक्स की शक्ति को दबाने की कोशिश की है। और यह भी शायद आपको पता होगा
कि सभ्यता जितनी विकसित होती है, उतने पागल बढ़ते जाते हैं, क्योंकि सभ्यता सबसे ज्यादा दमन सेक्स का करवाती है।
सभ्यता सबसे ज्यादा दमन, सप्रेशन सेक्स का करवाती है! और इसलिए हर आदमी अपने सेक्स को दबाता है, सिकोड़ता
है। वह दबा हुआ सेक्स विक्षिप्तता पैदा करता है, अनेक बीमारियां पैदा करता है, अनेक मानसिक रोग पैदा करता है।
सेक्स को दबाने की जो भी चेष्टा है, वह पागलपन है। ढेर साधु पागल होते पाए जाते हैं। उसका कोई कारण नहीं है सिवाय
इसके कि वे सेक्स को दबाने में लगे हुए हैं। और उनको पता नहीं है, सेक्स को दबाया नहीं जाता। प्रेम के द्वार खोलें, तो
जो शक्ति सेक्स के मार्ग से बहती थी, वह प्रेम के प्रकाश में परिणत हो जाएगी। जो सेक्स की लपटें मालूम होती थीं, वे प्रेम
का प्रकाश बन जाएंगी। प्रेम को विस्तीर्ण करें। प्रेम सेक्स का क्रिएटिव उपयोग है, उसका सृजनात्मक उपयोग है। जीवन को
प्रेम से भरें।
आप कहेंगे, हम सब प्रेम करते हैं। मैं आपसे कहूं, आप शायद ही प्रेम करते हों; आप प्रेम चाहते होंगे। और इन दोनों में
जमीन-आसमान का फर्क है। प्रेम करना और प्रेम चाहना, ये बड़ी अलग बातें हैं। हममें से अधिक लोग बच्चे ही रहकर मर
जाते हैं। क्योंकि हरेक आदमी प्रेम चाहता है। प्रेम करना बड़ी अदभुत बात है। प्रेम चाहना बिलकुल बच्चों जैसी बात है।
छोटे-छोटे बच्चे प्रेम चाहते हैं। मां उनको प्रेम देती है। फिर वे बड़े होते हैं। वे और लोगों से भी प्रेम चाहते हैं, परिवार उनको
प्रेम देता है। फिर वे और बड़े होते हैं। अगर वे पति हुए, तो अपनी पत्नियों से प्रेम चाहते हैं। अगर वे पत्नियां हुईं, तो वे
अपने पतियों से प्रेम चाहती हैं। और जो भी प्रेम चाहता है, वह दुख झेलता है। क्योंकि प्रेम चाहा नहीं जा सकता, प्रेम
केवल किया जाता है। चाहने में पक्का नहीं है, मिलेगा या नहीं मिलेगा। और जिससे तुम चाह रहे हो, वह भी तुमसे
चाहेगा। तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी। दोनों भिखारी मिल जाएंगे और भीख मांगेंगे। दुनिया में जितना पति-पत्नियों का संघर्ष है,
उसका केवल एक ही कारण है कि वे दोनों एक-दूसरे से प्रेम चाह रहे हैं और देने में कोई भी समर्थ नहीं है।
इसे थोड़ा विचार करके देखना आप अपने मन के भीतर। आपकी आकांक्षा प्रेम चाहने की है हमेशा। चाहते हैं, कोई प्रेम करे।
और जब कोई प्रेम करता है, तो अच्छा लगता है। लेकिन आपको पता नहीं है, वह दूसरा भी प्रेम करना केवल वैसे ही है
जैसे कि कोई मछलियों को मारने वाला आटा फेंकता है। आटा वह मछलियों के लिए नहीं फेंक रहा है। आटा वह मछलियों को
फांसने के लिए फेंक रहा है। वह आटा मछलियों को दे नहीं रहा है, वह मछलियों को चाहता है, इसलिए आटा फेंक रहा है।
इस दुनिया में जितने लोग प्रेम करते हुए दिखायी पड़ते हैं, वे केवल प्रेम पाना चाहने के लिए आटा फेंक रहे हैं। थोड़ी देर वे
आटा खिलाएंगे, फिर...।
और दूसरा व्यक्ति भी जो उनमें उत्सुक होगा, वह इसलिए उत्सुक होगा कि शायद इस आदमी से प्रेम मिलेगा। वह भी थोड़ा
प्रेम प्रदर्शित करेगा। थोड़ी देर बाद पता चलेगा, वे दोनों भिखमंगे हैं और भूल में थे; एक-दूसरे को बादशाह समझ रहे थे!
और थोड़ी देर बाद उनको पता चलेगा कि कोई किसी को प्रेम नहीं दे रहा है और तब संघर्ष की शुरुआत हो जाएगी।
दुनिया में दाम्पत्य जीवन नर्क बना हुआ है, क्योंकि हम सब प्रेम मांगते हैं, देना कोई भी जानता नहीं है। सारे झगड़े के
पीछे बुनियादी कारण इतना ही है। और कितना ही परिवर्तन हो, किसी तरह के विवाह हों, किसी तरह की समाज व्यवस्था
बने, जब तक जो मैं कह रहा हूं अगर नहीं होगा, तो दुनिया में स्त्री और पुरुषों के संबंध अच्छे नहीं हो सकते। उनके अच्छे
होने का एक ही रास्ता है कि हम यह समझें कि प्रेम दिया जाता है, प्रेम मांगा नहीं जाता, सिर्फ दिया जाता है। जो मिलता
है, वह प्रसाद है, वह उसका मूल्य नहीं है। प्रेम दिया जाता है। जो मिलता है, वह उसका प्रसाद है, वह उसका मूल्य
नहीं है। नहीं मिलेगा, तो भी देने वाले का आनंद होगा कि उसने दिया।
अगर पति-पत्नी एक-दूसरे को प्रेम देना शुरू कर दें और मांगना बंद कर दें, तो जीवन स्वर्ग बन सकता है। और जितना वे
प्रेम देंगे और मांगना बंद कर देंगे, उतना ही--अदभुत जगत की व्यवस्था है--उन्हें प्रेम मिलेगा। और उतना ही वे अदभुत
अनुभव करेंगे--जितना वे प्रेम देंगे, उतना ही सेक्स उनका विलीन होता चला जाएगा।

Wednesday, August 18, 2010

ऐसे पाएं गुस्से से आजादी

तमाम दूसरे इमोशंस की तरह गुस्सा आना भी नॉर्मल है। लेकिन अगर इसकी वजह से कोई शख्स खुद या किसी दूसरे को नुकसान पहुंचाने लगे, तो इस पर कंट्रोल बेहद जरूर
ी है। गुस्से को आप कैसे कर सकते हैं कंट्रोल, इसके बारे में बता रहे हैं
पवन सिंह और प्रभात गौड़

क्या है गुस्सा
गुस्सा एक नेचरल इमोशन है, जो चिड़चिड़ाहट, निराशा और मनमाफिक काम न होने की स्थितियों में सामने आता है। किसी हल्की झुंझलाहट से लेकर किसी स्थिति पर होने आने वाले तेज रिएक्शन को गुस्से के तौर पर परिभाषित किया जा सकता है। चूंकि यह एक नेचरल इमोशन है इसलिए इससे पूरी तरह निजात पाना संभव नहीं है। गुस्सा आना बिल्कुल नॉर्मल है, लेकिन अगर इसकी वजह से कोई शख्स खुद को या किसी और को नुकसान पहुंचाने लगे, तो इसके नुकसान से बचने के लिए इसे काबू में करना बेहतर है।

अलग-अलग तरह का गुस्सा
गुस्से को मोटे तौर पर दो हिस्सों में बांट सकते हैं : पैसिव एंगर और अग्रेसिव एंगर।

पैसिव एंगर : नीचे दिए गए लक्षण अगर हैं तो कहीं न कहीं मन में पैसिव एंगर होगा।
- दूसरों की पीठ पीछे बुराई करना, आई कॉन्टैक्ट से बचना, दूसरों को नीचा दिखाने की कोशिश करना।
- खुद साइडलाइन होकर दूसरों को किसी के खिलाफ उकसाना, झूठे आंसू बहाना, अपने नेगेटिव विचार किसी शख्स के जरिये अपने दुश्मन तक पहुंचाना।
- खुद को हरदम दोषी मानना, बिना बात के बार-बार माफी मांगना।
- अविश्सनीय लोगों पर निर्भर होना, छोटी-छोटी बातों पर नाराज होना और महत्वपूर्ण चीजों को नजरंदाज कर देना, सेक्सुअली कमजोर होना।
- तमाम तरह के ऑब्सेसिव डिस्ऑर्डर। मसलन सफाई को लेकर कुछ ज्यादा चिंतित रहना, सभी से परफेक्शन की उम्मीद रखना, बार-बार चीजों को चेक करना और छोटी-छोटी बातों पर वहम करना।
- परेशानी की हालत में पीठ दिखा देना, बहस जैसी स्थितियों से दूर भागना।

अग्रेसिव एंगर
- दूसरों को धमकाना, छींटाकशी करना, मुक्का दिखाना, ऐसे कपड़ों और सिंबल का यूज करना जिनसे गुस्से का इजहार होता है, तेज आवाज में कार का हॉर्न बजाना।
- दूसरों पर फिजिकल अटैक करना, गालियां देना, अश्लील जोक सुनाना, दूसरों की भावनाओं की परवाह न करना, बिना किसी गलती के दूसरों को सजा देना।
- सामान तोड़ना, जानवरों को नुकसान पहुंचाना, दो लोगों के बीच के रिश्ते खराब कर देना, गलत तरीके से ड्राइव करना, चीखना-चिल्लाना, दूसरों की कमजोरी के साथ खेलना, अपनी गलती का दोषारोपण दूसरों पर करना।
- जल्दी-जल्दी बोलना, जल्दी-जल्दी चलना, ज्यादा काम करना और दूसरों से ऐसी उम्मीद रखना कि वे भी ऐसा ही करें।
- दिखावा करना, हर वक्त लोगों की अटेंशन चाहना, दूसरों की जरूरतों को नजरंदाज कर देना, लाइन जंप करना।
- भूतकाल की बुरी यादों को हर वक्त याद करते रहना, दूसरों को माफ न कर पाना।

गुस्से की मैकेनिजम
जब किसी शख्स को गुस्सा आने वाला होता है, तो उसके हाथ-पैरों में खून का बहाव तेज हो जाता है, दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं, एड्रिनलिन हॉर्मोन तेजी से रिलीज होता है और बॉडी को इस बात के लिए तैयार कर देता है कि वह कोई ताकत से भरा एक्शन ले। इसके बाद गुस्सा व्यक्ति को धीरे-धीरे अपनी गिरफ्त में लेने लगता है, जिसकी वजह से शरीर में कुछ और केमिकल रिलीज होते हैं, जो कुछ पलों के लिए बॉडी को एनर्जी से भर देते हैं। दूसरी तरफ नर्वस सिस्टम में कॉर्टिसोल समेत कुछ और केमिकल निकलते हैं। ये केमिकल शरीर और दिमाग को कुछ पलों के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक प्रभावित करते हैं। ये दिमाग को उत्तेजित अवस्था में रखते हैं, जिससे दिमाग में विचारों का प्रवाह बेचैनी के साथ और बेहद तेज स्पीड से होने लगता है।

गुस्से की पहचान
- शरीर में बेचैन करने वाली सनसनाहट पैदा होती है।
- गुस्से में होने पर शरीर की मसल्स तन जाती हैं, जबड़े भिंच जाते हैं, चेहरा लाल हो जाता है और नजरें सामने वाले को घूरने लगती हैं। - ज्यादा बढ़ जाए तो सब कुछ तोड़ने-फोड़ने का मन करता है।

गुस्सा आने की वजह
- मोटे तौर पर देखें तो उम्मीदें पूरी न होने से पैदा होने वाली निराशा गुस्से की प्रमुख वजह है। जल्दी रिजल्ट न मिले या फिर रिजल्ट मन-मुताबिक न हो तो बेचैनी बढ़ जाती है और लोग असहज हो जाते हैं। यही बेचैनी और असहजता गुस्से की वजह बनती है।
- अगर कोई शख्स हमारी भावनाओं को किसी भी तरह से हर्ट कर दे तो उस शख्स पर हमें गुस्सा आने लगता है।
- उलझन की स्थिति लंबे वक्त तक चले तो उसका रिजल्ट गुस्से के रूप में सामने आता है।
- किसी से धोखा मिलना गुस्से की एक बड़ी वजह है।
- ऑफिस या घर में लगातार काम का दबाव।
- लंबी लाइन में खड़े होने पर, मनमाफिक काम न होने पर और बॉस की वेवजह फटकार पर भी गुस्सा आता है।
- जिन लोगों की सहन शक्ति कम होती है उन्हें गुस्सा ज्यादा आता है।
- कुछ लोग घर के बाकी सदस्यों को गुस्सा करते देख इसे अपनी आदत बना लेते हैं।
- डर, अपराध बोध, निराशा की स्थितियों में भी गुस्सा आता है।

तनाव का रूप गुस्सा
टेंशन किसी भी वजह से हो सकती है। चाहे ऑफिस में समय से काम पूरा न हुआ हो, पड़ोसी ने नया घर और नई कार खरीद ली हो, गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड ने धोखा दे दिया हो या फिर बच्चों की डिमांड पूरी न कर पा रहे हों। ये कुछ ऐसे उदाहरण हैं, जिनसे हम तनाव की गिरफ्त में आ सकते हैं। तनाव होने पर हमारी मानसिक स्थिति विकृत हो जाती है और सहनशक्ति कमजोर हो जाती है। ऐसी स्थिति में कुछ भी गलत होने पर हमें गुस्सा आ जाता है।

अनकंट्रोल्ड एंगर
एक स्थिति की कल्पना करें। किसी शख्स को एक जरूरी मीटिंग में जाना है। वह ट्रैफिक जाम में फंस जाता है। वक्त निकलता जा रहा है और वह कुछ नहीं कर सकता। ऐसे में फ्रस्ट्रेशन बढ़ने लगता है और धीरे-धीरे गुस्से में बदलने लगता है। यहां तक तो फिर भी ठीक है, लेकिन अगर इस गुस्से को कंट्रोल नहीं किया गया तो हो सकता है यह शख्स कार से बाहर आए और अपने सामने वाले ड्राइवर से गाली-गलौज करने लगे।

साइड इफेक्ट्स
- बॉडी में एड्रिनलिन और नोराड्रिनलिन हॉर्मोंस का लेवल बढ़ जाता है।
- हाई ब्लड प्रेशर, सीने में दर्द, तेज सिर दर्द, माइग्रेन, एसिडिटी जैसी कई शारीरिक बीमारियां हो सकती हैं।
- जो लोग जल्दी-जल्दी और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा हो जाते हैं, उन्हें स्ट्रोक, किडनी फेल्योर और मोटापा होने के चांस रहते हैं।
- ऐसा माना जाता है कि गुस्से में व्यक्ति ज्यादा खाता है, जिसका रिजल्ट होता है मोटापा।
- ज्यादा पसीना आना, अल्सर और अपच जैसी शिकायतें भी गुस्से की वजह से हो सकती हैं।
- ज्यादा गुस्से की वजह से दिल की ब्लड को पंप करने की क्षमता में कमी आती है और इसकी वजह से हार्ट मसल्स डैमेज होने लगती हैं। इससे हार्ट अटैक होने की आशंका बढ़ जाती है।
- लगातार गुस्से से रैशेज, मुंहासे जैसी स्किन से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं।

एंगर मैनेजमेंट : गुस्से को करें काबू

1. खुद को बदलें
गुस्से को पहचानें : गुस्से में हम भी गुस्से का ही रूप हो जाते हैं। ऐसे में गुस्से को पहचानना बेहद जरूरी है। जिस पल आपने यह जान लिया कि आपको गुस्सा आ रहा है, आप अलग और गुस्सा अलग। यानी गुस्से को साक्षी भाव से देखें। गुस्सा खुद ब खुद कम होता जाएगा। गुस्से का कारण है 'मैं' का ज्यादा होना। अपने ईगो को कम करें। इसके लिए प्रेम बढ़ाएं। आमतौर पर किसी इंसान की जिंदगी में चार पांच लोग ऐसे होते हैं, जिन पर उसे गुस्सा आता है। इन लोगों के प्रति अगर 'मैं गुस्सा कैसे कम करूं?' का चिंतन करेंगे तो गुस्सा और बढ़ेगा। इसकी जगह इन लोगों के प्रति प्रेम बढ़ाएं। प्रेम बढ़ेगा तो गुस्सा खुद-ब-खुद कम होगा। जिंदगी में ठहाकों की कमी न होने दें। खुलकर हंसें और मस्ती करें।

जीवन स्तर में सुधार : ऐसा देखा जाता है कि जिन लोगों की क्वालिटी ऑफ लाइफ बेहतर है, उन्हें गुस्सा कम आता है। अगर आप अव्यवस्थित, गैरअनुशासित, ओवरवर्क्ड और स्ट्रेस में हैं तो आपको गुस्सा भी ज्यादा आएगा। इसके लिए जो करें, व्यवस्थित तरीके से और समय रहते करें। काम के बीच में ब्रेक लें। परिवार और दोस्तों के लिए टाइम निकालें। जीवन को सपनों के आधार पर नहीं, वास्तविक धरातल पर जिएं। इन सभी चीजों के कॉम्बिनेशन से आपके अंदर बदलाव आएगा।
स्वीकार करें : अपने आस-पास के लोगों और चीजों को आप एक हद से ज्यादा नहीं बदल सकते। लोग और स्थितियों को बदल नहीं सकते तो उन्हें स्वीकार कर लें।
मेंटल टफनेस : गुस्से पर काबू पाने की दिशा में पहला कदम यह है कि आपको गुस्सा आए ही नहीं। इसके लिए जरूरी है कि आपका मन भीतर से शांत हो। मन भीतर से शांत होगा, तो आपकी सोच व्यापक होगी और आप दूसरों के पक्ष को समझ पाएंगे। इसके लिए मेंटली टफ होना जरूरी है। आपके दिमाग का संतुलन हमेशा बना रहना चाहिए, लेकिन ऐसी स्थिति हासिल करने के लिए लंबी प्रैक्टिस की जरूरत है। इसके लिए शुरू में सिर्फ 10 मिनट का टारगेट तय करें और मन में ठानें कि इन 10 मिनटों के दौरान मुझे शांत रहना है। चाहे जो हो जाए, मैं अपना मानसिक संतुलन इन 10 मिनटों के दौरान नहीं खोऊंगा। धीरे-धीरे वक्त बढ़ाते जाएं। 10 से 15 मिनट, 15 से 20... धीरे-धीरे ऐसी स्थिति आ जाएगी कि मानसिक रूप से शांत और संतुलित रहना आपकी आदत बन जाएगी।

अपने मालिक खुद : हम अक्सर कहते हैं - उसने मुझे गुस्सा दिला दिया। असली समस्या ही यह है। इस सोच का मतलब है कि आपने अपनी जिंदगी की डोर दूसरों के हाथ में दे रखी है। उसने चाहा तो आपको गुस्सा दिला दिया। उसने चाहा तो आपको दुखी कर दिया और चाहा, तो खुश कर दिया। 'उसने गुस्सा दिला दिया' के बदले कहना चाहिए कि 'मैं गुस्सा हो गया'। इससे जाहिर होगा कि गुस्सा आप खुद हुए यानी आपके ऊपर सिर्फ आपका वश चलता है, किसी और का नहीं। 'अपनी जिंदगी का सेंटर मैं खुद हूं' - जैसे-जैसे मन में यह बात स्ट्रॉन्ग होती जाती है, वैसे-वैसे हम शांत होते जाते हैं।

हताशा दूर करें : ज्यादा गुस्सैल लोग हमेशा दूसरों पर चीखते-चिल्लाते नहीं रहते, बल्कि ज्यादातर वक्त चुपचाप और हताश रहते हैं। ऐसे लोगों के गुस्सा करने की वजह आमतौर पर कोई एक घटना नहीं होती, बल्कि ऐसी कई घटनाएं व्यक्ति के ऐसे स्वभाव के लिए जिम्मेदार हैं। जिन लोगों के साथ लंबे समय से ऐसा हो रहा है, उन्हें सबसे पहले अपनी हताशा दूर करने की कोशिश करनी चाहिए।

तुरंत रिएक्ट न करें : किसी पर गुस्सा आए तो कुछ बोलने से पहले मध्यम आवाज में दस, बीस, तीस या सौ तक गिनें। इस दौरान उन बातों को सोचें जो आप कहना चाहते हैं। इससे आपका गुस्सा कंट्रोल हो जाएगा और आप अपनी बात प्रभावी ढंग से रख सकेंगे। रोम में यह नुस्खा बहुत प्रचलित है।

जगह छोड़ दें : गुस्सा आए तो उस जगह को छोड़कर बाहर निकल जाएं। थोड़ा टहलें या कोई अच्छी-सी धुन सुनें। जब मन शांत हो जाए तो अपनी बात को सहजता से रखें। मीटिंग में गुस्सा आए तो दो मिनट के लिए बाहर आ जाएं, फिर चले जाएं। बच्चे पर गुस्सा आए तो दूसरे कमरे में चले जाएं। सामने वाले ड्राइवर पर गुस्सा आए तो गाड़ी में म्यूजिक चलाकर सुनना शुरू कर दें। कहने का मतलब यह है कि मन को उस स्थिति से डायवर्ट कर देना है।

तर्क करें : कई बार गुस्से को तर्क के जरिए शांत किया जा सकता है। किसी बात पर गुस्सा आए तो मन में ही तर्क करें। दिमाग में आने वाली तमाम बातों का जवाब मिल जाने से आपकी किसी से लड़ाई नहीं होगी।

भाषा सुधारें : भाषा पर जरूर ध्यान दें। मसलन 'ऐसा होना चाहिए' की बजाय 'ऐसा हो सकता है' कहना सही होगा। लोग अक्सर 'हमेशा' या 'कभी नहीं' जैसे शब्दों पर जोर देते हैं, जो सही नहीं है। इससे लड़ाई के दौरान समझौते की गुंजाइश कम हो जाती है।

कूल रहना सीखें : घर व ऑफिस की तमाम जिम्मेदारियां और परेशानियां आपको बंधा-सा महसूस कराती हैं। इससे आपका चिड़चिड़ा होने लाजिमी है। इससे बचने के लिए दिन में थोड़ा वक्त अपने लिए निकालें और इस दौरान पूरे दिन की बातों को सोचें। इससे आपको पता लगेगा कि आपने कहां ज्यादा गुस्सा किया।

डायरी लिखें : गुस्सा रीयल लाइफ में आने वाली समस्याओं की वजह से आता है। इन समस्याओं का समाधान निकालने की कोशिश करें। मन में आ रहे विचारों को एक डायरी में लिखते रहें। जिंदगी की तमाम समस्याओं का डटकर सामना करें और किसी हालत में हार न मानें। बस शांत रहकर निरंतर आगे बढ़ने की कोशिश करते रहें।

अनालिसिस नहीं : उस घटना का अनालिसिस न करें जिसकी वजह से आपको गुस्सा आया हो। ऐसा करने पर गुस्सा कम होने के बजाय और बढे़गा।

पंचिंग बैग : एक पंचिंग बैग खरीदें। जब भी गुस्सा आए, तो उस पंचिंग बैग का इस्तेमाल करें। वैसे कुछ साइकॉलजिस्ट गुस्सा कंट्रोल करने के इस तरीके को गैरवाजिब मानते हैं। उनका तर्क है कि जब भी गुस्सा आया और आपने उसे पंचिंग बैग पर निकाल दिया तो धीरे-धीरे यह आपकी आदत में शुमार हो जाएगा और लॉन्ग टर्म में आपके लिए नुकसानदायक होगा।

गुस्से को अपॉइंटमेंट : जब भी गुस्सा आए तो उसे मुल्तवी कर दें। मन में विचार करें कि यह गुस्सा मैं कल 12 बजे करूंगा, अभी नहीं। ऐसा करने से वह पल निकल जाएगा और आप गुस्से से बच जाएंगे। किसी भी तरह से मन को वहां से हटाएं। इससे गुस्सा उस वक्त नहीं आएगा।

2. लाइफस्टाइल में बदलाव और योग

- लाइफस्टाइल में बदलाव लाकर भी गुस्से को काबू किया जा सकता है। भागदौड़ कम करके अपने लिए रोजाना आधे घंटे का वक्त निकालें।
- इस आधे घंटे में 10-15 मिनट ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें और 15 मिनट ध्यान। ध्यान करते हुए यह सोचें कि आज पूरा दिन आपको कैसे बिताना है। कौन-कौन से काम करने हैं। साथ ही मन में यह भी दोहराएं कि किसी बात पर गुस्सा आने पर तुरंत रिएक्ट नहीं करना है।
- पद्मासन में बैठकर ओम का जाप करें।
-इन आसनों का रोजाना करें : पद्मासन, सिंहासन, शवासन, मर्कटासन।
- इन प्राणायाम को रोजाना करें : अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका और भ्रामरी।
- जिस वक्त गुस्सा आ रहा हो, उस वक्त आंखें बंद करें और अपना ध्यान सांसों पर केंद्रित कर दें। डीप ब्रीदिंग करें।
- खानपान में बदलाव करें। पानी ज्यादा पिएं। लिक्विड का सेवन ज्यादा हो। खाने में हरी सब्जियों का इस्तेमाल ज्यादा हो और भोजन सात्विक रहे।

3. कुछ नुस्खे
- माथे पर चंदन का तिलक लगाने से गुस्सा कम आता है।
- तुलसी और गंगाजल का सेवन करें।
- ज्यादा गुस्सा आता हो तो हर रोज खाली पेट दो सेब खाएं। ये सेब बिना छिले हों। इन्हें आराम से चबाकर खाना चाहिए।

गुस्सा जब बॉस करे
ऑफिस में अगर आपके काम से बॉस नाराज हैं और गुस्सा करते हैं तो उस समय चुपचाप उनकी बात सुन लें। अगर आपने वाकई गलत काम किया है तो उसे सुधारने की कोशिश करें, लेकिन अगर आपको लगता है कि आपने बिल्कुल सही काम किया है तो बॉस के मूड के ठीक होने का इंतजार करें। फिर इस बात को जरूर छेड़ें। हल्के अंदाज में उनसे कहें कि आपने मुझे जो काम सौंपा था, उसे मैंने सही तरीके से किया है और इस मामले में आपका गुस्सा करना मुझे सही नहीं लगा। प्यार से बॉस को यह बात समझाने के बाद वह आपकी बात पर जरूर गौर करेंगे। आपकी बात से सहमत होने पर भले ही वह आपसे न कहें, पर उन्हें मन ही मन यह अहसास होगा कि उन्होंने आप पर गुस्सा करके गलत किया। असल में आप गुस्सा नहीं, बधाई के पात्र थे।

बच्चों का हो रहा है दिमाग गर्म
बड़ों के साथ-साथ आजकल छोटे-छोटे बच्चों का भी दिमाग गर्म हो रहा है। इसके लिए एजुकेशन सिस्टम, लाइफस्टाइल और घर का माहौल जिम्मेदार है। पैरंट्स के बात-बात पर गुस्सा होने से उनका तरीका बच्चे भी सीख लेते हैं। उन्हें लगता है कि गुस्सा करने से उनकी सभी डिमांड पूरी हो जाएंगी। दूसरी ओर तेज रफ्तार जिंदगी में पैरंट्स बच्चों को ज्यादा समय नहीं दे पाते। बच्चों का अकेलापन उनमें तनाव बढ़ाता है और उनके स्वभाव को चिड़चिड़ा बना देता है, जिससे बच्चे न सिर्फ गुस्सा करने लगते हैं बल्कि सिगरेट, शराब जैसी गलत आदतों के भी शिकार हो जाते हैं। इसे दूर करने के लिए पैरंट्स को चाहिए कि वे बच्चों को भरपूर समय दें और घर के माहौल में बदलाव लाएं।

एक पहलू यह भी
अरस्तू ने कहा है, गुस्सा किसी को भी आ सकता है, लेकिन सही समय पर, सही मकसद के लिए और सही तरीके से गुस्सा करना हर किसी के वश की बात नहीं है। गुस्सा अगर क्रिएटिव हो तो इसे जरूर करना चाहिए, लेकिन अगर यह नेगेटिव है तो इससे बचने की कोशिश करनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर अगर आपका बेटा या बेटी अपने किसी क्लासमेट का कोई सामान चुराकर घर लाता है और आप बच्चे पर गुस्सा होते हैं तो यह पॉजिटिव गुस्सा है। इस स्थिति में भी यह ध्यान रखना चाहिए कि आप वाकई में गुस्सा न हों, बल्कि बच्चों को यह दिखाएं कि आप उससे नाराज हैं। दूसरी तरफ ऑफिस में बॉस ने आपको डांट दिया और उस गुस्से को आप अपने बच्चे या पत्नी पर निकालते हैं, तो यह गुस्से का नेगेटिव पक्ष है, जिससे बचा जाना चाहिए।

गुस्सा कम करने की टेकिन्क
- अपनी जिंदगी से जुड़ी पांच ऐसी चीजों (ट्रिगर्स) के बारे पता करें जिनकी वजह से आपको हमेशा गुस्सा आ जाता है। ये कुछ भी हो सकता है मसलन पड़ोसी के कुत्ते का भौंकना, कलीग की तरक्की, किसी के द्वारा इंसल्ट कर देना आदि।
- अब इन पांचों को रेटिंग दें। मतलब जिस बात से सबसे ज्यादा गुस्सा आता है, उसे पहले लिखें और इसी क्रम में आगे लिखते जाएं।
- अब एक-एक कर देखें कि इन ट्रिगर्स पर आप कैसे रिएक्ट करते हैं। एक हफ्ते तक देखें। ट्रिगर्स पर रिएक्ट करने का तरीका नीचे में से कोई भी हो सकता है।

1. आप दूसरे लोगों के साथ हाथापाई पर उतारू हो जाते हैं?
2. आप सामान और जानवरों को हिट या पंच करने लगते हैं?
3. अक्सर दरवाजे पीटते हैं?
4. सामान तोड़ना शुरू कर देते हैं?
5. गुस्से में अपने पैर पटकते हैं?
6. गुस्से के बाद पछतावा होता है?
7. सीधे-सीधे गुस्सा शो करने से बचते हैं और उसे अंदर ही अंदर घोटते हैं?
8. किसी स्थिति को लेकर पछताते और असहाय महसूस करते हैं?
9. आप कहते हैं कि इस बारे में बाद में बात करेंगे और ऐसा कभी नहीं करते?

- अब देखें कि मैं ऐसा क्या करूं कि गुस्से के वक्त होने वाले रिएक्शन से मेरा या किसी दूसरे का नुकसान न हो।
- अंतिम स्टेज में सोचें कि गुस्से को कम कैसे करूं और इसके लिए स्ट्रैटिजी बनाकर काम करें।