Wednesday, August 18, 2010

ऐसे पाएं गुस्से से आजादी

तमाम दूसरे इमोशंस की तरह गुस्सा आना भी नॉर्मल है। लेकिन अगर इसकी वजह से कोई शख्स खुद या किसी दूसरे को नुकसान पहुंचाने लगे, तो इस पर कंट्रोल बेहद जरूर
ी है। गुस्से को आप कैसे कर सकते हैं कंट्रोल, इसके बारे में बता रहे हैं
पवन सिंह और प्रभात गौड़

क्या है गुस्सा
गुस्सा एक नेचरल इमोशन है, जो चिड़चिड़ाहट, निराशा और मनमाफिक काम न होने की स्थितियों में सामने आता है। किसी हल्की झुंझलाहट से लेकर किसी स्थिति पर होने आने वाले तेज रिएक्शन को गुस्से के तौर पर परिभाषित किया जा सकता है। चूंकि यह एक नेचरल इमोशन है इसलिए इससे पूरी तरह निजात पाना संभव नहीं है। गुस्सा आना बिल्कुल नॉर्मल है, लेकिन अगर इसकी वजह से कोई शख्स खुद को या किसी और को नुकसान पहुंचाने लगे, तो इसके नुकसान से बचने के लिए इसे काबू में करना बेहतर है।

अलग-अलग तरह का गुस्सा
गुस्से को मोटे तौर पर दो हिस्सों में बांट सकते हैं : पैसिव एंगर और अग्रेसिव एंगर।

पैसिव एंगर : नीचे दिए गए लक्षण अगर हैं तो कहीं न कहीं मन में पैसिव एंगर होगा।
- दूसरों की पीठ पीछे बुराई करना, आई कॉन्टैक्ट से बचना, दूसरों को नीचा दिखाने की कोशिश करना।
- खुद साइडलाइन होकर दूसरों को किसी के खिलाफ उकसाना, झूठे आंसू बहाना, अपने नेगेटिव विचार किसी शख्स के जरिये अपने दुश्मन तक पहुंचाना।
- खुद को हरदम दोषी मानना, बिना बात के बार-बार माफी मांगना।
- अविश्सनीय लोगों पर निर्भर होना, छोटी-छोटी बातों पर नाराज होना और महत्वपूर्ण चीजों को नजरंदाज कर देना, सेक्सुअली कमजोर होना।
- तमाम तरह के ऑब्सेसिव डिस्ऑर्डर। मसलन सफाई को लेकर कुछ ज्यादा चिंतित रहना, सभी से परफेक्शन की उम्मीद रखना, बार-बार चीजों को चेक करना और छोटी-छोटी बातों पर वहम करना।
- परेशानी की हालत में पीठ दिखा देना, बहस जैसी स्थितियों से दूर भागना।

अग्रेसिव एंगर
- दूसरों को धमकाना, छींटाकशी करना, मुक्का दिखाना, ऐसे कपड़ों और सिंबल का यूज करना जिनसे गुस्से का इजहार होता है, तेज आवाज में कार का हॉर्न बजाना।
- दूसरों पर फिजिकल अटैक करना, गालियां देना, अश्लील जोक सुनाना, दूसरों की भावनाओं की परवाह न करना, बिना किसी गलती के दूसरों को सजा देना।
- सामान तोड़ना, जानवरों को नुकसान पहुंचाना, दो लोगों के बीच के रिश्ते खराब कर देना, गलत तरीके से ड्राइव करना, चीखना-चिल्लाना, दूसरों की कमजोरी के साथ खेलना, अपनी गलती का दोषारोपण दूसरों पर करना।
- जल्दी-जल्दी बोलना, जल्दी-जल्दी चलना, ज्यादा काम करना और दूसरों से ऐसी उम्मीद रखना कि वे भी ऐसा ही करें।
- दिखावा करना, हर वक्त लोगों की अटेंशन चाहना, दूसरों की जरूरतों को नजरंदाज कर देना, लाइन जंप करना।
- भूतकाल की बुरी यादों को हर वक्त याद करते रहना, दूसरों को माफ न कर पाना।

गुस्से की मैकेनिजम
जब किसी शख्स को गुस्सा आने वाला होता है, तो उसके हाथ-पैरों में खून का बहाव तेज हो जाता है, दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं, एड्रिनलिन हॉर्मोन तेजी से रिलीज होता है और बॉडी को इस बात के लिए तैयार कर देता है कि वह कोई ताकत से भरा एक्शन ले। इसके बाद गुस्सा व्यक्ति को धीरे-धीरे अपनी गिरफ्त में लेने लगता है, जिसकी वजह से शरीर में कुछ और केमिकल रिलीज होते हैं, जो कुछ पलों के लिए बॉडी को एनर्जी से भर देते हैं। दूसरी तरफ नर्वस सिस्टम में कॉर्टिसोल समेत कुछ और केमिकल निकलते हैं। ये केमिकल शरीर और दिमाग को कुछ पलों के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक प्रभावित करते हैं। ये दिमाग को उत्तेजित अवस्था में रखते हैं, जिससे दिमाग में विचारों का प्रवाह बेचैनी के साथ और बेहद तेज स्पीड से होने लगता है।

गुस्से की पहचान
- शरीर में बेचैन करने वाली सनसनाहट पैदा होती है।
- गुस्से में होने पर शरीर की मसल्स तन जाती हैं, जबड़े भिंच जाते हैं, चेहरा लाल हो जाता है और नजरें सामने वाले को घूरने लगती हैं। - ज्यादा बढ़ जाए तो सब कुछ तोड़ने-फोड़ने का मन करता है।

गुस्सा आने की वजह
- मोटे तौर पर देखें तो उम्मीदें पूरी न होने से पैदा होने वाली निराशा गुस्से की प्रमुख वजह है। जल्दी रिजल्ट न मिले या फिर रिजल्ट मन-मुताबिक न हो तो बेचैनी बढ़ जाती है और लोग असहज हो जाते हैं। यही बेचैनी और असहजता गुस्से की वजह बनती है।
- अगर कोई शख्स हमारी भावनाओं को किसी भी तरह से हर्ट कर दे तो उस शख्स पर हमें गुस्सा आने लगता है।
- उलझन की स्थिति लंबे वक्त तक चले तो उसका रिजल्ट गुस्से के रूप में सामने आता है।
- किसी से धोखा मिलना गुस्से की एक बड़ी वजह है।
- ऑफिस या घर में लगातार काम का दबाव।
- लंबी लाइन में खड़े होने पर, मनमाफिक काम न होने पर और बॉस की वेवजह फटकार पर भी गुस्सा आता है।
- जिन लोगों की सहन शक्ति कम होती है उन्हें गुस्सा ज्यादा आता है।
- कुछ लोग घर के बाकी सदस्यों को गुस्सा करते देख इसे अपनी आदत बना लेते हैं।
- डर, अपराध बोध, निराशा की स्थितियों में भी गुस्सा आता है।

तनाव का रूप गुस्सा
टेंशन किसी भी वजह से हो सकती है। चाहे ऑफिस में समय से काम पूरा न हुआ हो, पड़ोसी ने नया घर और नई कार खरीद ली हो, गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड ने धोखा दे दिया हो या फिर बच्चों की डिमांड पूरी न कर पा रहे हों। ये कुछ ऐसे उदाहरण हैं, जिनसे हम तनाव की गिरफ्त में आ सकते हैं। तनाव होने पर हमारी मानसिक स्थिति विकृत हो जाती है और सहनशक्ति कमजोर हो जाती है। ऐसी स्थिति में कुछ भी गलत होने पर हमें गुस्सा आ जाता है।

अनकंट्रोल्ड एंगर
एक स्थिति की कल्पना करें। किसी शख्स को एक जरूरी मीटिंग में जाना है। वह ट्रैफिक जाम में फंस जाता है। वक्त निकलता जा रहा है और वह कुछ नहीं कर सकता। ऐसे में फ्रस्ट्रेशन बढ़ने लगता है और धीरे-धीरे गुस्से में बदलने लगता है। यहां तक तो फिर भी ठीक है, लेकिन अगर इस गुस्से को कंट्रोल नहीं किया गया तो हो सकता है यह शख्स कार से बाहर आए और अपने सामने वाले ड्राइवर से गाली-गलौज करने लगे।

साइड इफेक्ट्स
- बॉडी में एड्रिनलिन और नोराड्रिनलिन हॉर्मोंस का लेवल बढ़ जाता है।
- हाई ब्लड प्रेशर, सीने में दर्द, तेज सिर दर्द, माइग्रेन, एसिडिटी जैसी कई शारीरिक बीमारियां हो सकती हैं।
- जो लोग जल्दी-जल्दी और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा हो जाते हैं, उन्हें स्ट्रोक, किडनी फेल्योर और मोटापा होने के चांस रहते हैं।
- ऐसा माना जाता है कि गुस्से में व्यक्ति ज्यादा खाता है, जिसका रिजल्ट होता है मोटापा।
- ज्यादा पसीना आना, अल्सर और अपच जैसी शिकायतें भी गुस्से की वजह से हो सकती हैं।
- ज्यादा गुस्से की वजह से दिल की ब्लड को पंप करने की क्षमता में कमी आती है और इसकी वजह से हार्ट मसल्स डैमेज होने लगती हैं। इससे हार्ट अटैक होने की आशंका बढ़ जाती है।
- लगातार गुस्से से रैशेज, मुंहासे जैसी स्किन से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं।

एंगर मैनेजमेंट : गुस्से को करें काबू

1. खुद को बदलें
गुस्से को पहचानें : गुस्से में हम भी गुस्से का ही रूप हो जाते हैं। ऐसे में गुस्से को पहचानना बेहद जरूरी है। जिस पल आपने यह जान लिया कि आपको गुस्सा आ रहा है, आप अलग और गुस्सा अलग। यानी गुस्से को साक्षी भाव से देखें। गुस्सा खुद ब खुद कम होता जाएगा। गुस्से का कारण है 'मैं' का ज्यादा होना। अपने ईगो को कम करें। इसके लिए प्रेम बढ़ाएं। आमतौर पर किसी इंसान की जिंदगी में चार पांच लोग ऐसे होते हैं, जिन पर उसे गुस्सा आता है। इन लोगों के प्रति अगर 'मैं गुस्सा कैसे कम करूं?' का चिंतन करेंगे तो गुस्सा और बढ़ेगा। इसकी जगह इन लोगों के प्रति प्रेम बढ़ाएं। प्रेम बढ़ेगा तो गुस्सा खुद-ब-खुद कम होगा। जिंदगी में ठहाकों की कमी न होने दें। खुलकर हंसें और मस्ती करें।

जीवन स्तर में सुधार : ऐसा देखा जाता है कि जिन लोगों की क्वालिटी ऑफ लाइफ बेहतर है, उन्हें गुस्सा कम आता है। अगर आप अव्यवस्थित, गैरअनुशासित, ओवरवर्क्ड और स्ट्रेस में हैं तो आपको गुस्सा भी ज्यादा आएगा। इसके लिए जो करें, व्यवस्थित तरीके से और समय रहते करें। काम के बीच में ब्रेक लें। परिवार और दोस्तों के लिए टाइम निकालें। जीवन को सपनों के आधार पर नहीं, वास्तविक धरातल पर जिएं। इन सभी चीजों के कॉम्बिनेशन से आपके अंदर बदलाव आएगा।
स्वीकार करें : अपने आस-पास के लोगों और चीजों को आप एक हद से ज्यादा नहीं बदल सकते। लोग और स्थितियों को बदल नहीं सकते तो उन्हें स्वीकार कर लें।
मेंटल टफनेस : गुस्से पर काबू पाने की दिशा में पहला कदम यह है कि आपको गुस्सा आए ही नहीं। इसके लिए जरूरी है कि आपका मन भीतर से शांत हो। मन भीतर से शांत होगा, तो आपकी सोच व्यापक होगी और आप दूसरों के पक्ष को समझ पाएंगे। इसके लिए मेंटली टफ होना जरूरी है। आपके दिमाग का संतुलन हमेशा बना रहना चाहिए, लेकिन ऐसी स्थिति हासिल करने के लिए लंबी प्रैक्टिस की जरूरत है। इसके लिए शुरू में सिर्फ 10 मिनट का टारगेट तय करें और मन में ठानें कि इन 10 मिनटों के दौरान मुझे शांत रहना है। चाहे जो हो जाए, मैं अपना मानसिक संतुलन इन 10 मिनटों के दौरान नहीं खोऊंगा। धीरे-धीरे वक्त बढ़ाते जाएं। 10 से 15 मिनट, 15 से 20... धीरे-धीरे ऐसी स्थिति आ जाएगी कि मानसिक रूप से शांत और संतुलित रहना आपकी आदत बन जाएगी।

अपने मालिक खुद : हम अक्सर कहते हैं - उसने मुझे गुस्सा दिला दिया। असली समस्या ही यह है। इस सोच का मतलब है कि आपने अपनी जिंदगी की डोर दूसरों के हाथ में दे रखी है। उसने चाहा तो आपको गुस्सा दिला दिया। उसने चाहा तो आपको दुखी कर दिया और चाहा, तो खुश कर दिया। 'उसने गुस्सा दिला दिया' के बदले कहना चाहिए कि 'मैं गुस्सा हो गया'। इससे जाहिर होगा कि गुस्सा आप खुद हुए यानी आपके ऊपर सिर्फ आपका वश चलता है, किसी और का नहीं। 'अपनी जिंदगी का सेंटर मैं खुद हूं' - जैसे-जैसे मन में यह बात स्ट्रॉन्ग होती जाती है, वैसे-वैसे हम शांत होते जाते हैं।

हताशा दूर करें : ज्यादा गुस्सैल लोग हमेशा दूसरों पर चीखते-चिल्लाते नहीं रहते, बल्कि ज्यादातर वक्त चुपचाप और हताश रहते हैं। ऐसे लोगों के गुस्सा करने की वजह आमतौर पर कोई एक घटना नहीं होती, बल्कि ऐसी कई घटनाएं व्यक्ति के ऐसे स्वभाव के लिए जिम्मेदार हैं। जिन लोगों के साथ लंबे समय से ऐसा हो रहा है, उन्हें सबसे पहले अपनी हताशा दूर करने की कोशिश करनी चाहिए।

तुरंत रिएक्ट न करें : किसी पर गुस्सा आए तो कुछ बोलने से पहले मध्यम आवाज में दस, बीस, तीस या सौ तक गिनें। इस दौरान उन बातों को सोचें जो आप कहना चाहते हैं। इससे आपका गुस्सा कंट्रोल हो जाएगा और आप अपनी बात प्रभावी ढंग से रख सकेंगे। रोम में यह नुस्खा बहुत प्रचलित है।

जगह छोड़ दें : गुस्सा आए तो उस जगह को छोड़कर बाहर निकल जाएं। थोड़ा टहलें या कोई अच्छी-सी धुन सुनें। जब मन शांत हो जाए तो अपनी बात को सहजता से रखें। मीटिंग में गुस्सा आए तो दो मिनट के लिए बाहर आ जाएं, फिर चले जाएं। बच्चे पर गुस्सा आए तो दूसरे कमरे में चले जाएं। सामने वाले ड्राइवर पर गुस्सा आए तो गाड़ी में म्यूजिक चलाकर सुनना शुरू कर दें। कहने का मतलब यह है कि मन को उस स्थिति से डायवर्ट कर देना है।

तर्क करें : कई बार गुस्से को तर्क के जरिए शांत किया जा सकता है। किसी बात पर गुस्सा आए तो मन में ही तर्क करें। दिमाग में आने वाली तमाम बातों का जवाब मिल जाने से आपकी किसी से लड़ाई नहीं होगी।

भाषा सुधारें : भाषा पर जरूर ध्यान दें। मसलन 'ऐसा होना चाहिए' की बजाय 'ऐसा हो सकता है' कहना सही होगा। लोग अक्सर 'हमेशा' या 'कभी नहीं' जैसे शब्दों पर जोर देते हैं, जो सही नहीं है। इससे लड़ाई के दौरान समझौते की गुंजाइश कम हो जाती है।

कूल रहना सीखें : घर व ऑफिस की तमाम जिम्मेदारियां और परेशानियां आपको बंधा-सा महसूस कराती हैं। इससे आपका चिड़चिड़ा होने लाजिमी है। इससे बचने के लिए दिन में थोड़ा वक्त अपने लिए निकालें और इस दौरान पूरे दिन की बातों को सोचें। इससे आपको पता लगेगा कि आपने कहां ज्यादा गुस्सा किया।

डायरी लिखें : गुस्सा रीयल लाइफ में आने वाली समस्याओं की वजह से आता है। इन समस्याओं का समाधान निकालने की कोशिश करें। मन में आ रहे विचारों को एक डायरी में लिखते रहें। जिंदगी की तमाम समस्याओं का डटकर सामना करें और किसी हालत में हार न मानें। बस शांत रहकर निरंतर आगे बढ़ने की कोशिश करते रहें।

अनालिसिस नहीं : उस घटना का अनालिसिस न करें जिसकी वजह से आपको गुस्सा आया हो। ऐसा करने पर गुस्सा कम होने के बजाय और बढे़गा।

पंचिंग बैग : एक पंचिंग बैग खरीदें। जब भी गुस्सा आए, तो उस पंचिंग बैग का इस्तेमाल करें। वैसे कुछ साइकॉलजिस्ट गुस्सा कंट्रोल करने के इस तरीके को गैरवाजिब मानते हैं। उनका तर्क है कि जब भी गुस्सा आया और आपने उसे पंचिंग बैग पर निकाल दिया तो धीरे-धीरे यह आपकी आदत में शुमार हो जाएगा और लॉन्ग टर्म में आपके लिए नुकसानदायक होगा।

गुस्से को अपॉइंटमेंट : जब भी गुस्सा आए तो उसे मुल्तवी कर दें। मन में विचार करें कि यह गुस्सा मैं कल 12 बजे करूंगा, अभी नहीं। ऐसा करने से वह पल निकल जाएगा और आप गुस्से से बच जाएंगे। किसी भी तरह से मन को वहां से हटाएं। इससे गुस्सा उस वक्त नहीं आएगा।

2. लाइफस्टाइल में बदलाव और योग

- लाइफस्टाइल में बदलाव लाकर भी गुस्से को काबू किया जा सकता है। भागदौड़ कम करके अपने लिए रोजाना आधे घंटे का वक्त निकालें।
- इस आधे घंटे में 10-15 मिनट ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें और 15 मिनट ध्यान। ध्यान करते हुए यह सोचें कि आज पूरा दिन आपको कैसे बिताना है। कौन-कौन से काम करने हैं। साथ ही मन में यह भी दोहराएं कि किसी बात पर गुस्सा आने पर तुरंत रिएक्ट नहीं करना है।
- पद्मासन में बैठकर ओम का जाप करें।
-इन आसनों का रोजाना करें : पद्मासन, सिंहासन, शवासन, मर्कटासन।
- इन प्राणायाम को रोजाना करें : अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका और भ्रामरी।
- जिस वक्त गुस्सा आ रहा हो, उस वक्त आंखें बंद करें और अपना ध्यान सांसों पर केंद्रित कर दें। डीप ब्रीदिंग करें।
- खानपान में बदलाव करें। पानी ज्यादा पिएं। लिक्विड का सेवन ज्यादा हो। खाने में हरी सब्जियों का इस्तेमाल ज्यादा हो और भोजन सात्विक रहे।

3. कुछ नुस्खे
- माथे पर चंदन का तिलक लगाने से गुस्सा कम आता है।
- तुलसी और गंगाजल का सेवन करें।
- ज्यादा गुस्सा आता हो तो हर रोज खाली पेट दो सेब खाएं। ये सेब बिना छिले हों। इन्हें आराम से चबाकर खाना चाहिए।

गुस्सा जब बॉस करे
ऑफिस में अगर आपके काम से बॉस नाराज हैं और गुस्सा करते हैं तो उस समय चुपचाप उनकी बात सुन लें। अगर आपने वाकई गलत काम किया है तो उसे सुधारने की कोशिश करें, लेकिन अगर आपको लगता है कि आपने बिल्कुल सही काम किया है तो बॉस के मूड के ठीक होने का इंतजार करें। फिर इस बात को जरूर छेड़ें। हल्के अंदाज में उनसे कहें कि आपने मुझे जो काम सौंपा था, उसे मैंने सही तरीके से किया है और इस मामले में आपका गुस्सा करना मुझे सही नहीं लगा। प्यार से बॉस को यह बात समझाने के बाद वह आपकी बात पर जरूर गौर करेंगे। आपकी बात से सहमत होने पर भले ही वह आपसे न कहें, पर उन्हें मन ही मन यह अहसास होगा कि उन्होंने आप पर गुस्सा करके गलत किया। असल में आप गुस्सा नहीं, बधाई के पात्र थे।

बच्चों का हो रहा है दिमाग गर्म
बड़ों के साथ-साथ आजकल छोटे-छोटे बच्चों का भी दिमाग गर्म हो रहा है। इसके लिए एजुकेशन सिस्टम, लाइफस्टाइल और घर का माहौल जिम्मेदार है। पैरंट्स के बात-बात पर गुस्सा होने से उनका तरीका बच्चे भी सीख लेते हैं। उन्हें लगता है कि गुस्सा करने से उनकी सभी डिमांड पूरी हो जाएंगी। दूसरी ओर तेज रफ्तार जिंदगी में पैरंट्स बच्चों को ज्यादा समय नहीं दे पाते। बच्चों का अकेलापन उनमें तनाव बढ़ाता है और उनके स्वभाव को चिड़चिड़ा बना देता है, जिससे बच्चे न सिर्फ गुस्सा करने लगते हैं बल्कि सिगरेट, शराब जैसी गलत आदतों के भी शिकार हो जाते हैं। इसे दूर करने के लिए पैरंट्स को चाहिए कि वे बच्चों को भरपूर समय दें और घर के माहौल में बदलाव लाएं।

एक पहलू यह भी
अरस्तू ने कहा है, गुस्सा किसी को भी आ सकता है, लेकिन सही समय पर, सही मकसद के लिए और सही तरीके से गुस्सा करना हर किसी के वश की बात नहीं है। गुस्सा अगर क्रिएटिव हो तो इसे जरूर करना चाहिए, लेकिन अगर यह नेगेटिव है तो इससे बचने की कोशिश करनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर अगर आपका बेटा या बेटी अपने किसी क्लासमेट का कोई सामान चुराकर घर लाता है और आप बच्चे पर गुस्सा होते हैं तो यह पॉजिटिव गुस्सा है। इस स्थिति में भी यह ध्यान रखना चाहिए कि आप वाकई में गुस्सा न हों, बल्कि बच्चों को यह दिखाएं कि आप उससे नाराज हैं। दूसरी तरफ ऑफिस में बॉस ने आपको डांट दिया और उस गुस्से को आप अपने बच्चे या पत्नी पर निकालते हैं, तो यह गुस्से का नेगेटिव पक्ष है, जिससे बचा जाना चाहिए।

गुस्सा कम करने की टेकिन्क
- अपनी जिंदगी से जुड़ी पांच ऐसी चीजों (ट्रिगर्स) के बारे पता करें जिनकी वजह से आपको हमेशा गुस्सा आ जाता है। ये कुछ भी हो सकता है मसलन पड़ोसी के कुत्ते का भौंकना, कलीग की तरक्की, किसी के द्वारा इंसल्ट कर देना आदि।
- अब इन पांचों को रेटिंग दें। मतलब जिस बात से सबसे ज्यादा गुस्सा आता है, उसे पहले लिखें और इसी क्रम में आगे लिखते जाएं।
- अब एक-एक कर देखें कि इन ट्रिगर्स पर आप कैसे रिएक्ट करते हैं। एक हफ्ते तक देखें। ट्रिगर्स पर रिएक्ट करने का तरीका नीचे में से कोई भी हो सकता है।

1. आप दूसरे लोगों के साथ हाथापाई पर उतारू हो जाते हैं?
2. आप सामान और जानवरों को हिट या पंच करने लगते हैं?
3. अक्सर दरवाजे पीटते हैं?
4. सामान तोड़ना शुरू कर देते हैं?
5. गुस्से में अपने पैर पटकते हैं?
6. गुस्से के बाद पछतावा होता है?
7. सीधे-सीधे गुस्सा शो करने से बचते हैं और उसे अंदर ही अंदर घोटते हैं?
8. किसी स्थिति को लेकर पछताते और असहाय महसूस करते हैं?
9. आप कहते हैं कि इस बारे में बाद में बात करेंगे और ऐसा कभी नहीं करते?

- अब देखें कि मैं ऐसा क्या करूं कि गुस्से के वक्त होने वाले रिएक्शन से मेरा या किसी दूसरे का नुकसान न हो।
- अंतिम स्टेज में सोचें कि गुस्से को कम कैसे करूं और इसके लिए स्ट्रैटिजी बनाकर काम करें।

Friday, April 23, 2010

tere ehsaas se mohabbat ki hai,

teri har baat se mohabbat ki hai,
tere ehsaas se mohabbat ki hai,


tu mere paas nahi hai phir bhi,
teri yaad se mohabbat ki hai,


main tumko kis tarha bhool sakta hoon,
maine teri har ada se mohabbat ki hai,


kabhi to usne bhi mujhe yaad kiya hoga,
maine un lamhe se mohabbat ki hai,


jinme ho sirf teri or meri baatein,
maine un baato se mohabbat ki hai,


or jo mehka ho sirf teri hi mohabbat se,
maine un jazbaat se mohabbat ki hai,


tujhse milna to ab khawaab sa lagta hai,
maine tere intezaar se mohabbat ki hai,


maine teri har ada se har jaza se mohabbat ki hai,
maine sirf or sirf tumse mohabbat ki hai...!!!

in reference to: orkut - my orkut (view on Google Sidewiki)

Sunday, April 18, 2010

Us ki muskurahat tere liye ek fareb thi

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Aaj udhas hoon to zamana mujhey phochne aya ..
Magar Jis pe tha sadiyon ka bharam who nahi aya..
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Who to ek khuwaab tha toot gaya bikhar gaya hai..
Ajj udhas lamhon main phir kyon mujhe who yaad aya..
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Zindagi ki musafit ke who chand din Jo guzar chuke hain..
Na hi un pe urooj aya,our na hi un pe zawaal aya...
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Bhool na chahta hoon har lamha,har waqt Jo guzar gaya hai..
Jitna bhi roka who waqt utna mere sath chala aya...
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Guzra hua kal na tha mera,na hai mera our na ho Ga kabhi...
Yeh mein janta hoon magar phir bhi na dil ko karaar aya..
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Who wade teray who kasmein who sab yaad hain mujhe...
Magar phir bhi kabhi tum ko mera dil na bhula paya..
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Aana paye the tum to khudaar tha main bhi..
Yeh rishta hi humare dermiyan na raas aya..
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Us ki muskurahat tere liye ek fareb thi "HIRENDRA"
Tu tha nadan,dil tera usse na samajh paya..

Thursday, April 15, 2010

Har ek jazbaat ko zubaan nahi milti

Har ek jazbaat ko zubaan nahi milti



Har ek aarzu ko dua nahi milti


Muskaan banaey rakho to Duniya hai saath


Aansuon ko to aankhon main bhi panaah nahi milti.

Tuesday, March 30, 2010

Teri khusboo nahi milti,tera lehja nahi milta




Teri khusboo nahi milti,tera lehja nahi milta
Hamain to shehar mai koi,teray jaisa nahi milta


Yeh kis dhundh mai hum tum,safar-e-aghaaz kar baithay
Tumhain aankhain nahi milti hamain chehra nahi milta

Har ik tadbeer apni raaigaan tehri mohabbat mai
kisi bhi khwaab ko tabeer ka rasta nahi milta

Bhala is k dukhon ki raat ka koi madawa hai
Woh maa jis ko kabhi khoya hua bacha nahi milta

Musaafat mai duaa-e-abr un ka saath daiti hai
Jinhain sehra k daaman mai koi darya nahi milta

Jahan zulmat ragon mai apnay panjay gaar daiti hai
Is hi taareek rastay per diya jalta nahi milta