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Monday, September 19, 2011
Thursday, September 15, 2011
best hindi Poams
बात बात में तेरी बात निकलती है …
यूँही कभी दबी तेरी याद निकलती है …
आह भरके भी अब क्या फायदा …
हर साँस में घुली आस निकलती है
रोज नए नखरे कर वो सब को लुभावे से
मैं सजधज पिया की राह निहारूँ
दूरबीन लिए छत पे वो चाँद तके से…!!!
प्यास मुझे भी है…
सवाल कुछ मुझे भी है…
जवाब की आस मुझे भी है…
जवाब की आस मुझे भी है…
किस बात पे हूँ बेचैन…
इंतज़ार ख़त का मुझे भी है…
इंतज़ार ख़त का मुझे भी है…
काश जान पाती हाल उनका…
विरह से जलन मुझे भी है…
विरह से जलन मुझे भी है…
बिच मौन जुलस्ता रहा…
लफ्जों की तलाश मुझे भी है…
भीतर दूरियाँ खलती रही…
एक नज़र की प्यास मुझे भी है…
एक नज़र की प्यास मुझे भी है…
कभी गली के नुक्कड़ पे
तो कभी चाय की लारी पे
मिले थे दोस्त
वोह कॉलेज की कैन्टीन
मस्ती भरा माहोल
कभी घर की छत पर
मिलके सब करते थे पार्टी
रात के बारह बजे
डोर बेल बजती
बर्थ डे विश करते
खूब हल्लागुल्ला शोर मचाते
वोह नाईट-वेर में केक-कट करती फोटो !!!
वाह…… कितने मस्ती भरे सुहाने दिन थे
आज ज़माना कितना बदल गया…!!!
चेट रूम में मिलते है दोस्त
दूर देशावर में बैठे
अलग अलग भाषा बोलते
अनजान प्रदेश के
न देखा न कभी मिले हुए
पलभर में मित्र बन जाते है…!!!
साथ बैठ अब चाय-काफ्फी पिने की बात कहाँ रही
वोह पुराने दोस्तों का अता-पाता ही गुम है…!!!
हाँ वो सोसिअल नेट्वोर्किंग साईट पर मिल जाते है…!!
लिफ्ट में मिलते पडोशी को
“कैसे है ?” पूछने ला संबंध भी कहाँ…?
नेट पर अनजान दोस्तों से
“HOW WAS YOUR DAY…?”
रोज़ पूछना चुकते नहीं…!!!
बर्थ डे पर खूब सारे SMS और e-card मिलते है
ये मोबाइल कैलंडर सब याद रखता है…!!!!
ये ज़माना कितना फास्ट है…!!!
नेट पर चेट करते
इटली की छोरी और गुज्जु छोरा
मिले बिन हो गया प्रेम बहुत गहरा
छोरी छप्पन की छोरा सोला बरस का…!!!
“रब ने बना दी जोड़ी………..”
ये ज़माना…………………….
पति-पत्नी की अपनी अलग अलग लाइफ है
नाम बदल नेट पर चोरी-छुपे दोनों के प्रेमप्रकरण है
भगवान् भी क्या खिलाड़ी है….!
नेट पर डेट में आमने सामने पति-पत्नी है….!!!
“राम मिलाई जोड़ी……….”
ये ज़माना…………………….
यहाँ पल में दिल मिलते इ-फूल खिलते
और घड़ीभर में हो जाता इ-ब्रेक अप
सेड सोंग एक पूरा बजा नहीं वहाँ फिर दिल जुड़ जाता…!!!
“छोटी सी Fevi Kwic बस ५ रुपैये में……….”
ये ज़माना कितना फास्ट है……!!!
कलयुग सतयुग की छोडो बाते हुई पुरानी
समज लो जी इ आया नया टेकयुग…!!!
Friday, September 9, 2011
pad raha hai tere hi nur mere chehare par
मैं अपने आप मे तुझ को तलाशता क्यूँ हूँ
ऐसे तो हर शक्स तुझ सा लगे जमाने मे
शाम सुबह जमीं आसमां चारसू तू ही तू है
इतनी सी थी बात जो मैं जान गया अनजाने मे
पड़ रहा है तेरा ही नूर मेरे चेहरे पर
वरना कौन देखता मुझे इस वीराने मे
Tuesday, August 9, 2011
Tum Ko Khat Likhte
Likhe parhe hote agar
To tum ko khat likhte
Us khat main tumeen hum
Kiya kiya likhne k bahane likhte
Kuch khawab adhure likhte
Kuch geet suhane likhte
Jo baat abhi tak tum se
Ghabra kar bool na paye
Jo bheet tumare age
Sharma kar khool na paye
Apna dewana pan to
Khol kar dewane likhte
Likhte k ghani barkha main
Suraj ki kiran lagti ho
Sawan ki ghata main lipta
Chanda ka badan lagti ho
Yadoon main tumari kho kar
Hum bhi afsane likhte
Jab shaam ko thandi thandi
Dakhan se hawa ati hay
Har sans main dhimi dhimi
Ek aag laga jati hay
Kat te hain tumare gham main
Kaise woh zamane likhte
Kuch loog ruth kar bhi
Kuch loog ruth kar bhi
Lagte hain kitne pyare
Chup rah k bhi nazar main
Hain pyar k isharee
Hum un pe berukhi ka
Ilzaam kyun lagayeen
Un ki jafa ka aye dil
Hum kyun bura manayeen
Jo chayeen ab kareen woh
Dil pe sitam hamare
Is dil main kaise kaise
Tufaan machal rahe hain
Apni hi aag main hum
Chup chaap jal rahe hain
Hain kitne khubsurat
Is aag k shararee
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